2018 में 8 लाख से ज्यादा भारतीय हुए बैंकिंग ट्रोजन का शिकार


गैजेट डेस्क. साल 2018 में 4% भारतीय बैंकिंग ट्रोजन से प्रभावित हुए।सायबर सिक्योरिटी फर्म कास्परस्की लैब की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2018 में करीब 8 लाख 89 हजार भारतीय यूजर्स को बैंकिंग ट्रोजन का सामना करना पड़ा, जबकि 2017 में यह आंकड़ा 7 लाख 67 हजार का था।साल 2017 की तुलना में 2018 में बैंकिंग ट्रोजन अटैक 15.9% बढ़ा है।

कास्परस्की लैब के सिक्योरिटी एक्सपर्ट ओलेग कुप्रीव ने कहा, ‘इंडीविजुअलयूजर्स की बात करें तो 2018 में उन्हें फाइनेंशियल खतरों से ज्यादा राहत नहीं मिली है। हमारे डाटा के अनुसार कई बैंकर्स पैसे कमाने के लिए शिकार ढूंढ रहे हैं जिन पर वो हमला कर सकें। इनमें से एक आरटीएम बैंकिंग ट्रोजन भी था, जिसके कारण 2018 में प्रभावित लोगों के आंकड़ों में बढ़ोतरी हुई।’

उन्होंने यूजर्स को सलाह देते हुए कहा, ‘हम यूजर्स से आग्रह करते हैं कि अपने कम्प्यूटर से ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करते समय सावधान रहें। साइबर क्रिमिनल्स को कम ना आंके और अपने कम्प्यूटर को असुरक्षित ना छोड़ें।’

घटे हैं फाइनेंशियलफिशिंग के मामले

रूस, जर्मनी, वियतनाम, इटली, यूएस और चाइना के यूजर्स को जीबोट, गोजी, स्पायआई जैसे बैंकिंग मालवेयर अटैक का सामना करना पड़ा।बैंकिंग मालवेयर के मामले में जीबोट और गोजी सबसे ज्यादा फैले हुए मालवेयर हैं। जीबोट दुनिया के 26%, गोजी 20% और स्पायआई 15.6% यूजर्स को अपना निशाना बना चुके हैं।रिपोर्ट के अनुसार, फाइनेंशियल फिशिंग के मामले 53.85% से घटकर 44.7% पर पहुंच गए हैं।

क्या है ट्रोजन

ट्रोजन एक प्रकार का कम्प्यूटर प्रोग्राम होता है, जो कम्प्यूटर के महत्वपूर्ण डाटा को चुरा या मिटा सकता है। कोई हैकर ट्रोजन की मदद से किसी भी कम्प्यूटर को कंट्रोल भी कर सकता है। बैंकिंग ट्रोजन यूजर के डिवाइस में घुसकर यूजर की बैंकिंग इंफॉर्मेशन को हैकर तक पहुंचा देता है।

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new report says 4% indian got hit by banking Trojans in 2018

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