जंगलों में टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए शुरू की होम स्टे सर्विस, ग्रामीणों और आदिवासियों को मुहैया कराते हैं रोजगार


कुलदीप सिंगोरिया | नई दिल्ली .देश के बड़े शहरों में टेक्नोलॉजी पर आधारित हजारों स्टार्टअप्स कामयाबी हासिल कर रहे हैं। लेकिन हिमाचल प्रदेश के ईकोस्फीयर स्टार्टअप्स ने ईकाे सेंसिटिव जोन स्पीति में बगैर किसी फंडिंग के ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव की कहानी लिख दी है। इकोस्फीयर दुर्गम लेकिन पर्यटन के लिहाज से बेहद खूबसूरत जंगलों में सैलानियों को होम स्टे जैसी कई सुविधाएं देकर ग्रामीणों को रोजगार के मौके उपलब्ध करा रहा है।

2002 में महज 23 साल की इशिता खन्ना और उनके दो अन्य साथियों ने स्पीति में इस स्टार्टअप की शुरुआत की। बाद में दोनों साथी अलग हो गए है लेकिन इशिता ने काम जारी रखा। शुरुआत में ग्रामीणों को टूरिज्म की ट्रेनिंग देकर उन्हें होम स्टे जैसी सुविधाओं के लिए तैयार किया। 2004 में केंद्र सरकार के साथ राज्य सरकारें भी इको टूरिज्म की नीतियां तैयार करने लगीं। इसी के तहत भारत के जंगलों को टूरिज्म के लिए खोलने का फैसला किया गया। कंपनी ने इस मौके का फायदा उठाया और स्पीति के गांवों में इंको टूरिज्म सेंटर बनाए।

अब उनका स्टार्टअप सिर्फ टूरिज्म तक सीमित नहीं है। कंपनी शिल्पकारी, जंगल के उत्पाद, सोलर एनर्जी, ग्रीन हाउस खेती आदि कई क्षेत्रों में भी सक्रिय है। लद्दाख और सिक्किम में भी सर्विस शुरू कर दी गई है। इशिता बताती हैं कि जल्द ही मध्यप्रदेश और कर्नाटक के जंगल वाले इलाकों में भी वे कंपनी का ऑपरेशन शुरू करने वाली हैं।

बिजनेस मॉडल: इकोस्फीयर स्टार्टअप की वेबसाइट के जरिए पर्यटक जंगल में ठहरने के लिए बुकिंग करा सकते हैं

टूरिज्म से कमाए हुए पैसे से होता है गांव का विकास :इशिता के मुताबिक उनका स्टार्टअप इको टूरिज्म के जरिए लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास मॉडल विकसित करने के लिए काम करता है। पहले लोगों को ट्रेंड किया जाता है। फिर इससे हुई कमाई में सबको हिस्सा दिया जाता है। कुछ रकम को बचाकर गांव की समस्याएं दूर करने और विकास के लिए उपयोग किया जाता है। स्टार्टअप टूरिज्म के अलावा खेती के लिए ग्रीन हाउस मॉडल विकसित करने और शिल्पकारों को प्रोत्साहित करने का काम भी करता है।

देहरादून में स्कूलिंग के दौरान ही हो गया था जंगलों से लगाव :इशिता बताती हैं कि देहरादून में स्कूलिंग के दौरान ही उन्हें जंगलों से लगाव हो गया था। बाद में उन्होंने दिल्ली और फिर मुंबई से सोशल वर्क में पढ़ाई की। इसी दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में टूरिज्म के जरिए आर्थिक समृद्धि का विचार आया। फिर शिमला में दो साल के लिए ग्रामीण विकास विभाग में सरकारी नौकरी की। इसी अनुभव के आधार पर इकोस्फीयर स्टार्टअप शुरू किया। इकोस्फीयर का
मुख्य संचालन स्पीति से ही होता है। सामान्य कामकाज के लिए दिल्ली में भी दफ्तर है।

हर साल 25 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है इको टूरिज्म :इको टूरिज्म के जरिए पर्यटक दुर्गम इलाकों में भी स्थानीय लोगों के घर में रुककर आसपास के परिवेश का लुत्फ उठाता है। उद्योग संगठन फिक्की द्वारा ट्रैवल एंड टूरिज्म पर जारी एक रिपोर्ट के अनुसार 2029 तक हर साल इस सेक्टर में 10 लाख नौकरियां जुड़ने का अनुमान है। साल 2019 तक भारत में इस क्षेत्र का कारोबार 35-40 लाख करोड़ रुपए का हो जाएगा। इसमें इको टूरिज्म का हिस्सेदारी 30 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। भारत में इको टूरिज्म सेक्टर हर साल 25% की दर से बढ़ रहा है।

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