दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर बढ़ रही भीड़, कामचलाऊ ट्रेनिंग से विजेता बनने की चाह ले रही जान


लाइफस्टाइल डेस्क. नेपाल स्थित दुनिया की सबसे ऊंचीमाउंट एवरेस्ट की चोटी पर विजय पाने के लिए जिस गति सेभीड़ जुटरही है, वहां पर मौत के आंकड़े भी उसी अनुपात में बढ़ रहे हैं। पिछले पांच महीनों से मौसम के अनुकूल होने के साथ ही सैकड़ों लोग एवरेस्ट के बेस कैम्पों में पहुंच रहे हैं। मीडिया में आ रही एवरेस्ट पर कतार में खड़े लोगों की भीड़ चिंता बढ़ाने वाली है क्योंकि अब तक 11 पर्वतारोहियों की जान जा चुकी है और कुछ लापता भी बताए जाते हैं।

6 हफ्ते तक चले सर्च ऑपरेशन मेंरेस्क्यू टीम को पिछले दिनों बर्फ में दबे 4 शव और 10 टन कचरा भी मिला है।हालांकि नेपाल में एवरेस्ट का प्रबंधन करने वाले टूरिस्ट विभाग के महानिदेशक दांडु राज घिमिरे इस बात को नकारते हैं कि मौतें भीड़ बढ़ने के कारण हो रही है।

दैनिक भास्कर प्लस ऐपके लिए अंकित गुप्ता ने हरियाणा के पर्वतारोहण विशेषज्ञ विकास यादव और 2013 के एवरेस्ट विजेता हिमाचल केखिमीरामसे जाना एवरेस्ट पर बढ़तीभीड़, मौतोंऔर कचरा बढ़ने के पीछे की वजह।

  1. न्यूयॉर्कटाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एवरेस्ट पर चढ़ाई के दौरान होने वाली मौतों की वजहन तो पर्वतारोहियों की संख्या औरन ही बिगड़ता मौसम है। इसकेदो बड़ेकारण हैं। पहला, ट्रैवल कंपनियां ऐसे पर्वतारोहियों को भेज रही हैं जो ट्रैकिंग के लिए पूरी से प्रशिक्षित नहीं हैं। दूसरा, पर्वतारोहियों की संख्या नियंत्रित करने के लिए नेपाल सरकार ने कोई नीति नहीं बनाई है। सरकारी नीतियां न होने के कारण गैर-अनुभवी लोगों के कारण पहाड़ों पर अफरा-तफरी मच रही है।

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  2. भारत केपर्वतारोहण विशेषज्ञविकास यादव कहते हैं, ज्यादातर मौतें चोटी से उतरते समय हो रही हैं। इसका कारण समिट के दौरान ऑक्सीजन की कमीहोना भी है। भीड़ बढ़ने के कारण लक्ष्य साधकर निकलेपर्वतारोहियों को कतार में खड़ा होना पड़ रहा है। यहां कम ऑक्सीजन के अलावा भी एल्टीट्यूड माउंटेन सिकनेस (ऊंचाई के चलते होने वाली बीमारी) और हाइपोथर्मिया (अत्यधिक ठंड के कारण शरीर का तापमान लगातार गिरना) से भी जूझना पड़ रहा है।इसके अलावा ज्यादातर लोग पूरी तरह से प्रशिक्षण लेकर चढ़ाई नहीं कर रहे,नतीजतनइतनी ऊंचाई पर शरीर साथ नहीं दे पाता।

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  3. 26 हजार फुट ऊंचाई पर पहुंचने पर पर्वतारोही डेथ जोन से होकर गुजरते हैं जहां ऊंचाई से लगने वाले डर और मसल्स को नियंत्रित न कर पाने की स्थिति भी बनती है। कई बार स्थिति ऐसी भी बनती है कि सामने दिख रहीं चीजों को दिमाग समझ नहीं पाता। विकास यादव ने बताया, नेपाल सरकार से परमिट आसानी से मिलने के कारण ट्रैकर यहां से चढ़ना पसंद करते हैं। तिब्बत की ओर से चढ़ाई करने के लिए चीन सरकार से अनुमति लेनी होती है। यहां से परमिट मिलना कठिन होता है।

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  4. सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 20 मई को नेपाल की ओर से चढ़ाई करने वालों की संख्या ज्यादा होने के कारण पर्वताराहियों को पहाड़ पर ही लाइन लगाकर इंतजार करना पड़ा था। इनमें ऐसे लोगों की संख्या ज्यादा थी जिन्हें पहाड़ पर चढ़ने का अनुभव बेहद कम था। ये चोटी पर अतिरिक्त ऑक्सीजन के साथ समय बिता पाने में सक्षम नहीं थे। ऐसी स्थिति में कृत्रिम रूप ऑक्सीजन दी जाए तो भी कुछ ही घंटों के बाद शरीर नियंत्रण से बाहर हो सकता है।सिर्फ पर्वतारोही ही नहीं, इनकी मदद करने वाले ऑपरेटरों में भी अनुभव की कमी पाई गई।

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  5. एवरेस्ट पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने वाली नेपाल की 14 टीमों ने हाल ही में जो रिपोर्ट दी है, वह चौंकाने वाली है। टीम का कहना है कि बेस कैंपों में कचरा तेजी से बढ़ रहा है। करीब 8 हजार मीटर की ऊंचाई पर पर्वतारोही केन, बोतल, प्लास्टिक, क्लाइंबिंग गियर, टेंट और गैस के कनस्तर छोड़कर जा रहे हैं। ऐसे मामलों को रोकने के लिए चीन में फरवरी में नया नियम लागू किया था। जिसके मुताबिक, तिब्बत वाले हिस्से में गैर अनुभवी पर्वतारोहियों केबेस कैंप में जाने पर पाबंदी लगा दी गई थी।

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  6. एवरेस्ट पर बढ़ती भीड़ का जिक्र मौत के कुछ घंटे पहले ब्रिटेन के रॉबिन हानेस ने इंस्टाग्राम परआपबीतीपोस्ट की थी। रॉबिन की मौत 25 मई को 8600 मीटर पर एल्टीट्यूड सिकनेस के कारण हुई थी। रॉबिन ने पोस्ट में लिखा था कि कैसे एक भारतीय और आइरिश पर्वतारोही की मौत हुई थी और 700 लोग चोटी पर पहुंचने की राह देख रहे हैं। पोस्ट के मुताबिक, एक ही रूट होने के कारण लोगों को कतार में इंतजार करना पड़ रहा था। रॉबिन का यह 25वां दौरा था।

    19 मई को रॉबिन हॉनेस की इंस्टाग्राम पोस्ट जिसमें उन्होंने एवरेस्ट के हालात बताए थे। यह पोस्ट उन्होंने अपनी चढ़ाई शुरू करने की तैयारियों और वहां के हालात का जिक्र करते हुए लिखी थी।इस पोस्ट के पांच दिन बाद उनकी मौत हो गई थी।

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  7. पर्वतारोही खिमीराम बताते हैं कि,एवरेस्ट की चोटी फतह करने के लिए के दो रास्ते हैं। पहला, नेपाल होकर जाना और दूसरा, चीन में तिब्बत वाले रूट से होकर पहुंचना। चीन में परमिट के नियमों में सख्ती होने के कारण ज्यादातर लोग नेपाल के रास्ते से होकर जाते हैं। आवेदन करने के लिए नेपाल में कई एडवेंचर ट्रैवल कंपनियां हैं जो पैकेज के साथ परमिट दिलवाती हैं। इसमें करीब 30-35 लाख का खर्चा आता है। पैकेज की कीमत सुविधाओं के मुताबिक घट-बढ़ भी सकती है।

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    • खिमीराम के मुताबिक, एवरेस्ट फतह करने के लिए सबसे जरूरी बेहतर ट्रेनिंग है। इसे पूरी करने के बाद ही एवरेस्ट जाने की तैयारी करें।कोर्स के दो हिस्से होते हैं बेसिक और एडवांस्ड।
    • एडवांस्ड कोर्स के बाद कम से कम 6 हजार मीटर से कम ऊंचाई वाली चोटी पर चढ़ने के लिए खुद को समर्थ बनाएं।
    • अलग-अलग समय में 6 हजार मीटर ऊंचाई वाली चोटी पर 5-6 बार चढ़ने के बाद ही एवरेस्ट जाने के लिए मन बनाएं। ज्यादातर पर्वतारोही पहली बार में ही इसे फतह करना चाहते हैं लेकिन शरीर उनका साथ नहीं दे पाता।
    • विकासकहते हैं कि चढ़ाई करने से पहले अपनी तैयारी को जांचें। तय करें कि 1 घंटे में 10 किलोमीटर की दूरी तय कर पा रहे हैं या नहीं।
    • कम ऊंचाई वाली चोटी को चढ़ने की कोशिश करें, ताकि शरीर कम ऑक्सीजन में भी चढ़ाई के लिए लिए तैयार हो सके। धीरे-धीरे स्टेमिना बढ़ाएं।
    • ट्रैकिंग के दौरान तेज न चलें और जरूरत पड़ने पर ऑक्सीजन लेते रहें। कैंप-4 सबसे खतरनाक माना जाता है इसलिए यहां पर ट्रेनिंग में बताई गईं जरूरी सावधानी जरूर बरतें।
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      why crowd and death toll rate increasing on Mount Everest

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